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चेस्टर हिल जमीन विवाद में सरकार का बड़ा एक्शन,धारा 118 के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई और केस दर्ज करने के निर्देश

चेस्टर हिल जमीन विवाद में सरकार का बड़ा एक्शन, डीसी सोलन को जांच के आदेश
धारा 118 के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई और केस दर्ज करने के निर्देश
बेनामी लेनदेन साबित होने पर जमीन सरकार में वेस्ट हो सकती है


शिमला/सोलन: हिमाचल प्रदेश में चर्चित चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 जमीन विवाद ने अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए डीसी सोलन को विस्तृत जांच और कानूनी कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट, 1972 की धारा 118 के संभावित उल्लंघन के तहत केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाए। आज जारी आदेशों में दिसंबर 2025 के उस पुराने पत्र को भी वापस ले लिया गया है, जिसमें पूर्व जांच पर रोक लगाने जैसे निर्देश दिए गए थे।

मामले की जड़ में सोलन के एसडीएम (सिविल) की विस्तृत जांच रिपोर्ट बताई जा रही है, जिसमें चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट से जुड़े भूमि सौदों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कागजों में जमीन स्थानीय कृषक के नाम दर्ज है, लेकिन वास्तविक निर्माण, मार्केटिंग और फ्लैट बिक्री एक गैर-कृषक डेवलपर फर्म द्वारा संचालित की जा रही थी। खरीदारों से मिली राशि सीधे डेवलपर के खातों में जमा होने के दस्तावेज भी सामने आए हैं।

सरकार के इस आदेश के बाद अब यह संभावना तेज हो गई है कि यदि जांच में बेनामी लेनदेन या धारा 118 का उल्लंघन सिद्ध होता है, तो संबंधित जमीन को सरकार में निहित (वेस्ट) किया जा सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राज्य की जमीन नीतियों और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन सकता है।

इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्ष और वाम दलों ने पहले ही इस मामले में एसआईटी या न्यायिक जांच की मांग की है। विधानसभा में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठा और मुख्य सचिव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए। दूसरी ओर, मुख्य सचिव ने इन आरोपों को निराधार बताया है।